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ऐ ज़िंदगी गले लगा ले।

ऐ ज़िंदगी ना जाने क्या कर रहा हूँ मैं,
तुझे जीने के लिए हर रोज़ मर रहा हूँ मैं।

एक अजीब दास्तान (3)

लेकिन मेरी टीचर मुझे उसके पास से उठा देती थी फिर भी वो मेरे पास बैठती थी उसका मेरे बैठना मेरी को दो गुना बढ़ा देता था कुछ महीने बीते और आया स्कूल की छुट्टियों का मैं तो अपने गाँव में ही अपनी छुट्टियां बिताता था लेकिन वह अपनी नानी के घर जाती थी मेरी ये समझ आरहा था कि मुझे क्या करना है और मैंने सोच लिया मैं उसको मना कर दूँगा कि वह ना जाए तो अगली सुबह जब मैं स्कूल पहुंचा तो मेरा इंतजार कर रही थी पहली बार वह मुझसे पहले स्कूल पहुंच कर मेरा इंतज़ार कर रही थी जब मैं पहुंचा तो उसने मुझे डाटना शुरू किया तू इतना देर से क्यों आया मैं तेरा इंतज़ार कर रही थी
उसने वही बात शुरू की जो मैं कहना चाहता था कि वो नानी के घर जा रही है वो बहुत खुश थी उसे खुश देख कर मैं कुछ ना कह सका और बाद में उसने कहा कि तू मुझे बहुत याद आयेगा।

एक अजीब दास्तान (2)

जब सारी कोशिशें नाकाम रही तो समझ में नहीं आया क्या करें तो एक दिन टीचर गणित पढ़ा रहे थे और गणित मैं अच्छा था। टीचर ने कुछ सवाल दिये मैंने सब कर लिये और टीचर को दिखा कर बैठ गया सारे सवाल सही थे, बाकी बच्चे सवाल कर ही रहे थे परंतु किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि कैसे होगा और फिर अचानक उसकी नज़र मुझपे पड़ी उसने देखा मैं बैठा हुआ हूँ तो उसने मेरे पास आकर पूछा तुमने सब सही किया वो मुझे पूछ रही थी और मैं बिना कुछ बोले सिर्फ उसे देखे ही जा रहा था मेरी तो कैसे लौटरी हो लग हो। फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और फिर पूछा बताओ मुझे ये सवाल नहीं आते मैंने उसे अपनी कॉपी दी और सवाल किये तब जा कर हमारी बात हुई। उस दिन के बाद हर दिन मेरे बहुत महत्वपूर्ण सा हो गया। मैं हर रोज स्कूल जल्दी पहुंच कर उसके लिए जगह रखता ताकि वो मेरे पास बैठ सके लेकिन....



एक अजीब दास्तान

ये बात तब की है जब मैं 10 वर्ष का हुआ करता था उस वक्त की खास बात यह है कि तब दिल साफ और बेहद मासूम हुआ करता है जब तीसरी या चौथी कक्षा में था तो मेरी ही कक्षा मे एक लड़की थी जो मुझे बेहद पसंद थी मैं उससे बात करना चाहता था परंतु उसके और मेरे बीच कुछ फासले थे, वो ये थे कि वो अमीर बाप की बेटी थी और मैं एक गरीब किसान का  बेटा! ये बात मथुरा जिले के एक गाँव की जिसमें मेरा पूरा बचपन बीता तो गाँव में सब देखकर चलना पड़ता है कि कौन कैसा है, किस जाति का है और ये बात मुझे अच्छे से पता थी लेकिन दिल मासूम है कैसे माने  तो मैंने हर वो कोशिश की जो मुझे मौका उससे बात करने का परन्तु मेरी कोई भी कोशिश काम ना आ सकी तो ये सोचते रहे कि अब क्या किया जाए उससे बात हो जाए

हाले ए दिल

हाल-ए-दिल ना पूछिये जनाब,
ना कह पा रहे हैं
ना सह पा रहे हैं!

यादें

आज भी तेरी याद में निकल आते हैं आंशू
वजह सिर्फ तेरी यादें नहीं,
मेरी कुछ गलतियाँ भी हैं ।