एक अजीब दास्तान (2)

जब सारी कोशिशें नाकाम रही तो समझ में नहीं आया क्या करें तो एक दिन टीचर गणित पढ़ा रहे थे और गणित मैं अच्छा था। टीचर ने कुछ सवाल दिये मैंने सब कर लिये और टीचर को दिखा कर बैठ गया सारे सवाल सही थे, बाकी बच्चे सवाल कर ही रहे थे परंतु किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि कैसे होगा और फिर अचानक उसकी नज़र मुझपे पड़ी उसने देखा मैं बैठा हुआ हूँ तो उसने मेरे पास आकर पूछा तुमने सब सही किया वो मुझे पूछ रही थी और मैं बिना कुछ बोले सिर्फ उसे देखे ही जा रहा था मेरी तो कैसे लौटरी हो लग हो। फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और फिर पूछा बताओ मुझे ये सवाल नहीं आते मैंने उसे अपनी कॉपी दी और सवाल किये तब जा कर हमारी बात हुई। उस दिन के बाद हर दिन मेरे बहुत महत्वपूर्ण सा हो गया। मैं हर रोज स्कूल जल्दी पहुंच कर उसके लिए जगह रखता ताकि वो मेरे पास बैठ सके लेकिन....



Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

जिसे दुनियाँ माँ कहती है।

सुनो तुम्‍हारी याद आ रही है।

एक अधूरी सी मुलाक़ात