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एक अजीब दास्तान

ये बात तब की है जब मैं 10 वर्ष का हुआ करता था
उस वक्त की खास बात यह है कि तब दिल साफ और बेहद मासूम हुआ करता है
जब तीसरी या चौथी कक्षा में था तो मेरी ही कक्षा मे एक लड़की थी जो मुझे बेहद पसंद थी
मैं उससे बात करना चाहता था परंतु उसके और मेरे बीच कुछ फासले थे, वो ये थे कि वो अमीर बाप की बेटी थी और मैं एक गरीब किसान का  बेटा! ये बात मथुरा जिले के एक गाँव की जिसमें मेरा पूरा बचपन बीता तो गाँव में सब देखकर चलना पड़ता है कि कौन कैसा है, किस जाति का है और ये बात मुझे अच्छे से पता थी लेकिन दिल मासूम है कैसे माने 
तो मैंने हर वो कोशिश की जो मुझे मौका उससे बात करने का परन्तु मेरी कोई भी कोशिश काम ना आ सकी तो ये सोचते रहे कि अब क्या किया जाए उससे बात हो जाए  

Comments

  1. i have two questions for you bro
    1. tu 10 saal ki age me bs 3 class me tha?

    2 us ldki se baat hui thi ya nhi

    ReplyDelete
  2. Pahli jawab ye ki shayad चौथी भी हो सकती है
    दूसरा बात हुई और बहुत ache se hui

    ReplyDelete
  3. Replies
    1. Sir ji Bachpan or bachpana दोनों ही थी वो

      Delete
  4. बात कैसे हुई ये next para me pta chalega

    ReplyDelete

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सुनो तुम्‍हारी याद आ रही है।

सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

दिल ये मेरा अब मेरी सुनता नहीं है
हर वक्त तुमसे मिलने को कहता है
इस पागल दिल को तुम ही समझाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

जब से तुमसे मिला हू
खुद से तुम्हारी बातें करता हूं
ये प्यार है या पागलपन, इस गलत फैमी को
तुम्ही आके मिटाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

तुम बहुत प्यारी हो
और मैं कुछ नासमझ सा हू
अपनी समझदारी के गुण मुझको भी सिखलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

सब pk कह कर बुलाते हैं मुझे
तुम कभी पीछे से 'पुनीत' कह कर बुलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना







बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।

बड़ी मासूम सी थी वो, जब  स्कूल जाया करती थी

जब मैं देखता था उसको, वो मुस्कुराया करती थी

बात नहीं होती थी मेरी, फिर भी आँखों ही आँखों में सब बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





धीरे-धीरे चलती थी वो, जब मैं देख लेता था

जाना चाहता था पास उसके, फिर भी खुद को रोक लेता था

धड़कन ठहर जाती थी मेरी, जब वो अक्सर मेरे खांसने पर पलट जाया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





सोचता था मैं, जब बात उससे होगी

क्या बोलूंगा उससे, क्या वो मुझे समझेगी

बहुत पास थी वो मेरे दिल के, मेरी धड़कन बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।



क्या तेरा टाइम आएगा

क्या तेरा टाइम आएगा

उदास रहता है हर पल

तू क्या किसी को समझाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



खुशी से तेरा कोई नाता नहीं

दिल तोड़ना तुझे आता नहीं

तू कब खुद की सुन पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



सपने तेरे बड़े हैं बहुत

तेरे जैसे लोग भी हैं बहुत

इन सपनों का तू कुछ कर पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।


मोहब्बत मिली तो, खुशियाँ भी मिली थीं

छूट गई राह में वो भी कहीं

क्या उसके जाने की वजह भी जान पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।।