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Showing posts from November, 2018

ऐ ज़िंदगी गले लगा ले।

ऐ ज़िंदगी ना जाने क्या कर रहा हूँ मैं,
तुझे जीने के लिए हर रोज़ मर रहा हूँ मैं।

एक अजीब दास्तान (3)

लेकिन मेरी टीचर मुझे उसके पास से उठा देती थी फिर भी वो मेरे पास बैठती थी उसका मेरे बैठना मेरी को दो गुना बढ़ा देता था कुछ महीने बीते और आया स्कूल की छुट्टियों का मैं तो अपने गाँव में ही अपनी छुट्टियां बिताता था लेकिन वह अपनी नानी के घर जाती थी मेरी ये समझ आरहा था कि मुझे क्या करना है और मैंने सोच लिया मैं उसको मना कर दूँगा कि वह ना जाए तो अगली सुबह जब मैं स्कूल पहुंचा तो मेरा इंतजार कर रही थी पहली बार वह मुझसे पहले स्कूल पहुंच कर मेरा इंतज़ार कर रही थी जब मैं पहुंचा तो उसने मुझे डाटना शुरू किया तू इतना देर से क्यों आया मैं तेरा इंतज़ार कर रही थी
उसने वही बात शुरू की जो मैं कहना चाहता था कि वो नानी के घर जा रही है वो बहुत खुश थी उसे खुश देख कर मैं कुछ ना कह सका और बाद में उसने कहा कि तू मुझे बहुत याद आयेगा।