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एक अजीब दास्तान (3)

लेकिन मेरी टीचर मुझे उसके पास से उठा देती थी फिर भी वो मेरे पास बैठती थी उसका मेरे बैठना मेरी को दो गुना बढ़ा देता था कुछ महीने बीते और आया स्कूल की छुट्टियों का मैं तो अपने गाँव में ही अपनी छुट्टियां बिताता था लेकिन वह अपनी नानी के घर जाती थी मेरी ये समझ आरहा था कि मुझे क्या करना है और मैंने सोच लिया मैं उसको मना कर दूँगा कि वह ना जाए तो अगली सुबह जब मैं स्कूल पहुंचा तो मेरा इंतजार कर रही थी पहली बार वह मुझसे पहले स्कूल पहुंच कर मेरा इंतज़ार कर रही थी जब मैं पहुंचा तो उसने मुझे डाटना शुरू किया तू इतना देर से क्यों आया मैं तेरा इंतज़ार कर रही थी
उसने वही बात शुरू की जो मैं कहना चाहता था कि वो नानी के घर जा रही है वो बहुत खुश थी उसे खुश देख कर मैं कुछ ना कह सका और बाद में उसने कहा कि तू मुझे बहुत याद आयेगा। 

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सुनो तुम्‍हारी याद आ रही है।

सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

दिल ये मेरा अब मेरी सुनता नहीं है
हर वक्त तुमसे मिलने को कहता है
इस पागल दिल को तुम ही समझाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

जब से तुमसे मिला हू
खुद से तुम्हारी बातें करता हूं
ये प्यार है या पागलपन, इस गलत फैमी को
तुम्ही आके मिटाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

तुम बहुत प्यारी हो
और मैं कुछ नासमझ सा हू
अपनी समझदारी के गुण मुझको भी सिखलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

सब pk कह कर बुलाते हैं मुझे
तुम कभी पीछे से 'पुनीत' कह कर बुलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना







बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।

बड़ी मासूम सी थी वो, जब  स्कूल जाया करती थी

जब मैं देखता था उसको, वो मुस्कुराया करती थी

बात नहीं होती थी मेरी, फिर भी आँखों ही आँखों में सब बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





धीरे-धीरे चलती थी वो, जब मैं देख लेता था

जाना चाहता था पास उसके, फिर भी खुद को रोक लेता था

धड़कन ठहर जाती थी मेरी, जब वो अक्सर मेरे खांसने पर पलट जाया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





सोचता था मैं, जब बात उससे होगी

क्या बोलूंगा उससे, क्या वो मुझे समझेगी

बहुत पास थी वो मेरे दिल के, मेरी धड़कन बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।



क्या तेरा टाइम आएगा

क्या तेरा टाइम आएगा

उदास रहता है हर पल

तू क्या किसी को समझाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



खुशी से तेरा कोई नाता नहीं

दिल तोड़ना तुझे आता नहीं

तू कब खुद की सुन पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



सपने तेरे बड़े हैं बहुत

तेरे जैसे लोग भी हैं बहुत

इन सपनों का तू कुछ कर पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।


मोहब्बत मिली तो, खुशियाँ भी मिली थीं

छूट गई राह में वो भी कहीं

क्या उसके जाने की वजह भी जान पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।।