एक अजीब दास्तान (4)

उसके इंतज़ार में मेरा एक-एक दिन एक साल जैसा बीत रहा था। ना कुछ खाने का मन करता था और ना ही कुछ करने का मेरा पूरा दिन खेतों ही बीतता था। दिन बीते महीने बीते उसके आने का वक्त हो गया था और मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।
 फिर वो आगयी फिर कुछ बाद मैं उससे मिला तो वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई और उससे ज्यादा मैं खुश था।
अगले दिन सुबह वो आई स्कूल और मैं देरी से गया था उसने मेरे लिए जगह रखी और कहने लगी तू जल्दी आया कर मुझे तुझसे बहुत सारी बातें करनी होती है। मैं फिर स्कूल जल्दी जाने लगा और फिर वही बहुत सारी बातें। ऐसे ही पूरा साल बीत गया परीक्षा खतम हुई। हम दोनों पास हो मेरे पिताजी मुझे दिल्ली ले आए और वो वही रह गयी।

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