जिसे दुनियाँ माँ कहती है।

नौ महीने जो हमें पेट में रखती है
हमें पता भी नहीं होता और वो ना जाने क्या-क्या सहती है
लाखों दर्द सह कर हमें वो जन्म देती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


ख़ुद का पेट खाली रह जाए, फिर भी मेरा पेट भरती है
मेरी एक मुस्कान पे वो हर बार मरती है
मुश्किलों से झुंज़ती रहती है वो मेरे लिए, ना जाने उसमें कौन सी शक्ति है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


उसके हर डांट में मेरी फिक्र छुपी है
मैं कभी घर आने में देर करूं तो, कहाँ रह गया मेरा बच्चा कहती है
घर पहुँचते ही, देर कैसे हो गई, दोपहर को खाना खाया था, ये सब पूछती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


मेरी हर छोटी - बड़ी जरूरतों पर वो ध्यान देती है
जब कभी मैं उससे ज़िद करता हूं, ऐसे नहीं करते बेटा
ये बोल कर वो रोक देती है
उसका अंदाज़ मुझे समझ नहीं आता, खुद ही मारती है मुझे और खुद ही रो देती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है.







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