Skip to main content

जिसे दुनियाँ माँ कहती है।

नौ महीने जो हमें पेट में रखती है
हमें पता भी नहीं होता और वो ना जाने क्या-क्या सहती है
लाखों दर्द सह कर हमें वो जन्म देती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


ख़ुद का पेट खाली रह जाए, फिर भी मेरा पेट भरती है
मेरी एक मुस्कान पे वो हर बार मरती है
मुश्किलों से झुंज़ती रहती है वो मेरे लिए, ना जाने उसमें कौन सी शक्ति है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


उसके हर डांट में मेरी फिक्र छुपी है
मैं कभी घर आने में देर करूं तो, कहाँ रह गया मेरा बच्चा कहती है
घर पहुँचते ही, देर कैसे हो गई, दोपहर को खाना खाया था, ये सब पूछती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है।


मेरी हर छोटी - बड़ी जरूरतों पर वो ध्यान देती है
जब कभी मैं उससे ज़िद करता हूं, ऐसे नहीं करते बेटा
ये बोल कर वो रोक देती है
उसका अंदाज़ मुझे समझ नहीं आता, खुद ही मारती है मुझे और खुद ही रो देती है
मैं उस देवी की बात कर रहा हूं, जिसे दुनियाँ माँ कहती है.







Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सुनो तुम्‍हारी याद आ रही है।

सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

दिल ये मेरा अब मेरी सुनता नहीं है
हर वक्त तुमसे मिलने को कहता है
इस पागल दिल को तुम ही समझाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

जब से तुमसे मिला हू
खुद से तुम्हारी बातें करता हूं
ये प्यार है या पागलपन, इस गलत फैमी को
तुम्ही आके मिटाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

तुम बहुत प्यारी हो
और मैं कुछ नासमझ सा हू
अपनी समझदारी के गुण मुझको भी सिखलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना

सब pk कह कर बुलाते हैं मुझे
तुम कभी पीछे से 'पुनीत' कह कर बुलाओ ना
सुनो तुम्हारी याद आ रही है
याद के साथ तुम भी आजाओ ना







बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।

बड़ी मासूम सी थी वो, जब  स्कूल जाया करती थी

जब मैं देखता था उसको, वो मुस्कुराया करती थी

बात नहीं होती थी मेरी, फिर भी आँखों ही आँखों में सब बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





धीरे-धीरे चलती थी वो, जब मैं देख लेता था

जाना चाहता था पास उसके, फिर भी खुद को रोक लेता था

धड़कन ठहर जाती थी मेरी, जब वो अक्सर मेरे खांसने पर पलट जाया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।





सोचता था मैं, जब बात उससे होगी

क्या बोलूंगा उससे, क्या वो मुझे समझेगी

बहुत पास थी वो मेरे दिल के, मेरी धड़कन बताया करती थी

बड़ी मासूम सी थी वो, जब स्कूल जाया करती थी।



क्या तेरा टाइम आएगा

क्या तेरा टाइम आएगा

उदास रहता है हर पल

तू क्या किसी को समझाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



खुशी से तेरा कोई नाता नहीं

दिल तोड़ना तुझे आता नहीं

तू कब खुद की सुन पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।



सपने तेरे बड़े हैं बहुत

तेरे जैसे लोग भी हैं बहुत

इन सपनों का तू कुछ कर पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।


मोहब्बत मिली तो, खुशियाँ भी मिली थीं

छूट गई राह में वो भी कहीं

क्या उसके जाने की वजह भी जान पाएगा

सोचता रहता है तू

क्या तेरा टाइम आएगा।।